बसना: गढ़फुलझर रोजगार सहायक पर लगे आरोपों की जांच शुरू, बोलीं एक भी हितग्राही से पैसे नहीं मांगे, सारे आरोप दुर्भावनापूर्ण
सीईओ के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम ने की जांच, सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे समर्थन में,पंचायत सचिव ने बयान में आरोपों पर नहीं की कोई टिप्पणी

देशराज दास बसना। बसना विकासखंड की ग्राम पंचायत गढ़फुलझर में रोजगार सहायक पर प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर पैसे लेने, ग्राम पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से नहीं रहने, मनरेगा कार्यों में लापरवाही तथा मनमानी करने के आरोपों की प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीयूष सिंह ठाकुर के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने 13 जुलाई को गढ़फुलझर पंचायत भवन पहुंचकर शिकायतकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित पक्षों से लिखित में बयान लिया। जांच के दौरान पंचायत परिसर में काफी गहमागहमी का माहौल रहा।
जांच दल में वरिष्ठ करारोपण अधिकारी रूपसिंह सिदार, सहायक विकास अधिकारी योगेश ठाकुर तथा तकनीकी सहायक सुंदरलाल शामिल रहे। टीम ने शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रारंभिक तथ्य बयान लिया। इधर, जांच के दो दिन बाद 15 जुलाई को रोजगार सहायक सुभाषिनी बरिहा के समर्थन में भी बड़ी संख्या में ग्रामीण जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन सौंपकर कहा कि रोजगार सहायक के खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उनका कहना था कि यदि वास्तव में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे लिए जाते, तो केवल चार-पांच लोगों से नहीं बल्कि सभी हितग्राहियों से राशि मांगी जाती।
ग्रामीणों ने दावा किया कि रोजगार सहायक ने मनरेगा के अलावा पंचायत की कई हितग्राही मूलक योजनाओं के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। शिकायत में रोजगार सहायक पर नरेश साहू से 5 हजार रुपये, सुजाता अगरचंद साव से 300 रुपये, केशव पांडे से 500 रुपये, जेमा पांडे से 500 रुपये तथा दयाराम से 500 रुपये लेने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं शिकायतकर्ता पंचों का कहना है कि रोजगार सहायक अपने ससुराल में रहती हैं, जिसके कारण मनरेगा सहित पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जांच के बीच रोजगार सहायक सुभाषिनी बरिहा ने पहली बार विस्तार से अपना पक्ष रखा।
उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह असत्य, निराधार और दुर्भावनावश लगाए गए बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत के अनेक हितग्राहियों ने स्वयं सेल्फ सर्वे किया था। इसके बाद मनरेगा के तकनीकी सहायक एवं उनके द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हितग्राहियों की उपस्थिति में सत्यापन किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी हितग्राही से न तो पैसे की मांग की गई और न ही किसी प्रकार का भेदभाव किया गया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी हितग्राही को पात्र या अपात्र घोषित करने का अधिकार रोजगार सहायक के पास नहीं होता। पात्रता का निर्धारण ग्रामसभा में सचिव, सरपंच, पंचों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में शासन के निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया जाता है।आवास सूची तैयार करने या किसी का नाम जोड़ने अथवा हटाने का अधिकार भी उनके पास नहीं है। सुभाषिनी बरिहा ने कहा कि यदि उनका उद्देश्य अवैध वसूली करना होता तो वे सभी हितग्राहियों से समान रूप से राशि मांगतीं। कुछ चुनिंदा लोगों से पैसे लेने का आरोप स्वयं इस शिकायत की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पंच मनरेगा में नियमों के विपरीत अपने पसंद के लोगों के नाम जोड़ने का दबाव बना रहे थे। ऐसा नहीं करने पर दुर्भावनावश उनके खिलाफ शिकायत की गई। उनका कहना है कि अधिकांश ग्रामीण उनके कार्य से संतुष्ट हैं, जिसका प्रमाण उनके समर्थन में सैकड़ों ग्रामीणों द्वारा जनपद पंचायत में सौंपा गया आवेदन है। ग्राम पंचायत में निवास नहीं करने के आरोप पर उन्होंने कहा कि उनका जाति एवं निवास प्रमाणपत्र गढ़फुलझर का है तथा वे मनरेगा के साथ-साथ पंचायत की अन्य शासकीय योजनाओं में भी नियमित रूप से कार्य करती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास जैसी महत्वपूर्ण योजना में किसी हितग्राही या पंच से पैसे मांगने का सवाल ही नहीं उठता और उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि पंचायत सचिव ने अपने दर्ज बयान में शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में न तो कोई स्पष्ट पुष्टि की और न ही उनका खंडन किया। सचिव के बयान में आरोपों को लेकर कोई विशेष टिप्पणी दर्ज नहीं होने से जांच का यह पहलू भी चर्चा का विषय बना रहा।
जांच दल के सदस्य एवं वरिष्ठ करारोपण अधिकारी रूपसिंह सिदार ने बताया कि शिकायत में लगाए गए सभी बिंदुओं पर दोनों पक्षों सहित संबंधित लोगों के लिखित बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अब सभी बयानों एवं उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे नियमानुसार उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।