पहली ही बारिश में बीच से फटी करोड़ों की सड़क, दो फाड़ हुई डामर की परत; ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी पर उठे गंभीर सवाल

देशराज दास बसना: विकासखंड के कापूडीह–बोइरमलीहाडीपा–बिरसिंगपाली मार्ग पर करीब 2 करोड़ 89 लाख की लागत से निर्मित 2.50 किलोमीटर लंबी डामर सड़क पहली ही बारिश की मार नहीं झेल सकी। सड़क कई स्थानों पर बीच से फट गई है और डामर की परत उखड़कर अलग हो गई है। सड़क के बीचों-बीच लंबी दरारें पड़ने से यह दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग, सरायपाली के माध्यम से कराया गया था तथा निर्माण कार्य का ठेका मनोज केडिया को दिया गया था। निर्माण के दौरान ही ग्रामीणों ने पुलिया एवं सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और मानकों की अनदेखी की लिखित शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी, लेकिन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

पहली बारिश ने खोल दी निर्माण की पोल
अब मानसून की पहली बारिश के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है। सड़क के बीचों-बीच गहरी दरारें पड़ गई हैं और कई स्थानों पर डामर की परत उखड़कर अलग हो चुकी है। कुछ हिस्सों में सड़क धंस गई है, जिससे आवागमन भी प्रभावित होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी यह हाल है तो आने वाले दिनों में पूरी सड़क क्षतिग्रस्त होने की आशंका है।
4 जुलाई को प्रकाशित हुई थी खबर
गौरतलब है कि 4 जुलाई को इस सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं और घटिया गुणवत्ता को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी। उस समय भी ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप यह भी था कि गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आने के बाद सड़क पर मुरूम डालकर खामियों को छिपाने का प्रयास किया गया।

अब भी जिम्मेदारों की चुप्पी
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ एम.के.तिवारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। वहीं विभाग के कार्यपालन अभियंता चंद्रशेखर चंद्राकर से भी मोबाइल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर उनसे बात नहीं हो सकी।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण कार्य जांच, दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई तथा ठेकेदार के खर्च पर सड़क का पुनर्निर्माण कराने की मांग कर रहे है । उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क यदि पहली ही बारिश में बीच से फट जाए, तो यह निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।