बसना

बसना: ग्राम पंचायत माधोपाली में 15वें वित्त विवाद पर पंचायत का पलटवार, बोली हर काम नियमानुसार, जांच से सामने आएगी सच्चाई

सरपंच, उपसरपंच, सचिव, 11 पंच और ग्रामीण आए समर्थन में: बोले- सभी विकास कार्य स्वीकृत प्रस्ताव के अनुरूप, शिकायत दुर्भावनावश की गई

बसना: ग्राम पंचायत माधोपाली में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर लगाए गए आरोपों के बीच अब पंचायत का पक्ष भी सामने आया है। सरपंच उर्मिला बरिहा, उपसरपंच कांशीराम पटेल, सचिव वेदबाई चौहान, 11 पंचों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि पंचायत के सभी विकास कार्य ग्रामसभा की स्वीकृति, पंचायत प्रस्ताव और शासन के निर्धारित नियमों के अनुरूप कराए गए हैं।

उनका कहना है कि कुछ लोग व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक कारणों से पंचायत की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से लगातार शिकायतें कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि जनपद पंचायत बसना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय जांच दल के ग्राम पहुंचने पर पंचायत की ओर से सभी आवश्यक अभिलेख, पंचायत प्रस्ताव, कार्ययोजना, भुगतान संबंधी दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए।

सरपंच, सचिव, पंचों और ग्रामीणों ने जांच में पूरा सहयोग करते हुए अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि उन्हें जांच प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी। पंचायत का दावा है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग ग्राम माधोपाली सहित आश्रित ग्राम झालपाली और डोंगरीपाली में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए किया गया है। इसके तहत 15 नए हैंडपंप स्थापित किए गए, छह हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई, 11 पचरियों का मरम्मत कार्य कराया गया तथा तीनों गांवों में नई स्ट्रीट लाइट लगाने और खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत की गई।

इसके अलावा पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पानी टंकियों से जुड़े कार्य, गौठान में लगभग 400 सोख्ता गड्ढों का निर्माण, स्वच्छता अभियान के तहत नियमित साफ-सफाई तथा पंचायत भवन की रंगाई-पुताई सहित कई विकास कार्य कराए गए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अधिकांश कार्य धरातल पर मौजूद हैं और उनका भौतिक सत्यापन जांच दल स्वयं कर रहा है।माधोपाली में मुरमीकरण कार्य को लेकर पंचायत ने स्पष्ट किया कि संबंधित सड़क पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया था, लेकिन लगातार बारिश शुरू होने से निर्माण कार्य बीच में रोकना पड़ा। मौसम अनुकूल होने पर शेष कार्य भी पूरा कर दिया जाएगा।

वहीं निजी बोरवेल की जियो-टैगिंग के संबंध में पंचायत ने इसे तकनीकी त्रुटि बताया। पंचायत का कहना है कि गलती की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग को अवगत कराकर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। सरपंच उर्मिला बरिहा, उपसरपंच कांशीराम पटेल पंचगण सरिता चंद्रा, संजय भास्कर, मनीषा साहू, भुनेश्वरी साहू, सरिता चंद्रा, सुकांति सिदार, कौशल जायसवाल, नरोत्तम नेताम, उत्तराबाई, मीना भास्कर ने बताया कि पूर्व सरपंच रूपेंद्र साहू सहित कुछ लोग अब भी पंचायत के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत द्वारा स्वतंत्र रूप से कार्य किए जाने के बाद मुख्यमंत्री पोर्टल, कलेक्टर, एसडीएम और जनपद पंचायत में लगातार शिकायतें कर प्रशासनिक दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उनका यह भी कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, इसके बावजूद जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।पंचायत के समर्थन में सामने आए पंचों और ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य सामने आ जाएंगे और पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उनका कहना है कि यदि कहीं कोई तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो उसका नियमानुसार निराकरण किया जाएगा, लेकिन बिना जांच पूरी हुए पंचायत की छवि खराब करना उचित नहीं है।

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