बसना

बसना: सरस्वती शिशु मंदिर बसना में तृतीय आचार्य विकास वर्ग संपन्न

बसना 16 अगस्त। सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसना में रविवार को तृतीय आचार्य विकास वर्ग का आयोजन उत्साह, अनुशासन एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य धनुर्जय साहू एवं अरेकेल मार्ग में संचालित शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य पोखराज पटेल , देवप्रसाद साव , अभिमन्यु दास के करकमलों द्वारा माँ सरस्वती, ॐ एवं माँ भारती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

प्रथम कालांश में तेजकुमार साव ने प्रार्थना अभ्यास के माध्यम से आचार्य-दीदियों को सुर, ताल एवं लय की बारीकियों का अभ्यास कराया। उन्होंने प्रार्थना को भावपूर्ण एवं लयबद्ध ढंग से प्रस्तुत करने के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। द्वितीय कालांश में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, केना के अंग्रेजी व्याख्याता शैलेंद्र नायक ने प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर प्रभावी अंग्रेजी शिक्षण की विधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने LSRW (Listening, Speaking, Reading, Writing) के माध्यम से सरल एवं सहज अंग्रेजी अध्यापन, शब्दकोश निर्माण तथा विद्यार्थियों के साथ अंग्रेजी में संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

तृतीय कालांश में विद्यालय के प्राचार्य धनुर्जय साहू ने सकारात्मक एवं नकारात्मक दृष्टिकोण के परिणामों तथा बच्चों की मानसिकता पर पड़ने वाले उनके प्रभाव पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने आचार्यों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण एवं प्रेरणादायी व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया। चतुर्थ कालांश में खेल एवं समता विषय के अंतर्गत बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में खेलों की भूमिका पर प्रशिक्षण दिया गया। विभिन्न प्रकार के खेलों की जानकारी प्रदान करते हुए आचार्य-दीदियों को उनका प्रयोगात्मक अभ्यास भी कराया गया।

विद्यालय के प्राचार्य धनुर्जय साहू के मार्गदर्शन एवं आचार्य-दीदियों के सक्रिय सहभागिता से आयोजित यह प्रशिक्षण वर्ग ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं सफल रहा। आचार्य विकास वर्ग का उद्देश्य आचार्यों में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक, मानसिक, शारीरिक एवं संस्कारात्मक विकास को और अधिक प्रभावी बनाना है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संघ प्रार्थना के साथ तृतीय आचार्य विकास वर्ग का समापन हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में विद्यालय की 61 आचार्य-दीदियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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