बसना

बसना : फसल बीमा में क्रॉप कटिंग का खेल?

8 गांवों के उत्पादन आंकड़ों पर उठे सवाल, 7 दिनों में जांच के आदेश के बाद भी डेढ़ माह तक खामोशी

देशराज दास बसना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिलने वाले मुआवजे का आधार बनने वाले क्रॉप कटिंग पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बसना विकासखंड के आठ गांवों में खरीफ वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज किए गए धान उत्पादन के आंकड़ों को लेकर शिकायतकर्ता ने बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया है। आरोप है कि फसल प्रयोग के दौरान वास्तविक उत्पादन से अलग आंकड़े दर्ज कर बीमा दावों को प्रभावित किया गया।

मामले की शिकायत भोजराज प्रधान, ग्राम भंवरपुर ने दिसंबर 2025 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बसना हरीशंकर पैकरा से की थी। शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला जन शिकायत पोर्टल तक पहुंचा। इसके बाद 18 जून 2026 को उप संचालक कृषि कार्यालय ने तहसीलदार और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को 7 दिवस के भीतर विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी न जांच पूरी हुई और न कार्रवाई हुई।

इन आंकड़ों ने बढ़ाया संदेह
शिकायत में दर्ज फसल प्रयोग के अनुसार सिंचित धान की औसत उपज ग्राम भैंसाखुरी, पिताईपाली, बड़ेडाभा, सोनामुंदी, अंकोरी, रूपापाली, छिरार्चुवा और बसुलीडीह में क्रमशः 1165.164, 1935.987, 1527.464, 1946.840, 1620.000, 1733.400, 1334.880 एवं 1877.760 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। वहीं असिंचित धान की औसत उपज क्रमशः 861.400, 1583.088, 1306.048, 882.808, 522.300, 1151.280, 803.160 एवं 969.441 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जो जांच का विषय है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन आंकड़ों और किसानों के वास्तविक उत्पादन के बीच भारी अंतर है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है। यदि फसल प्रयोग में दर्ज औसत उत्पादन सही है तो संबंधित गांवों में किसानों ने कितने रकबे में धान बोया, कितना रकबा समर्पित किया और समर्थन मूल्य पर कितनी मात्रा में धान बेचा? यदि खरीदी केंद्रों के रिकॉर्ड और फसल प्रयोग के आंकड़ों का मिलान कराया जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

जहां वही पटवारी, वहीं कम उपज!
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ चुनिंदा पटवारियों के कार्यक्षेत्र में लगातार औसत उत्पादन कम दर्ज किया जाता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इन अधिकारियों के पूर्व वर्षों के फसल प्रयोग, बीमा भुगतान और धान खरीदी के रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं फसल बीमा का लाभ प्रभावित करने के लिए आंकड़ों में हेरफेर तो नहीं हुआ। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब कृषि विभाग ने स्वयं सात दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, तो फिर महीनों बाद भी जांच पूरी क्यों नहीं हुई? क्या आगे इस मामले में कोई कार्रवाई होगी या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

मामले में कृषि उप संचालक महासमुंद एफआर कश्यप ने कहा कि पीजी पोर्टल के माध्यम से शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए कृषि विभाग और तहसील कार्यालय को निर्देशित किया गया है।

वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बसना यूके खेस ने बताया कि कृषि उप संचालक कार्यालय से शिकायत की जांच के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। चूंकि मामले से संबंधित कई रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास हैं, इसलिए तहसीलदार बसना को जांच के लिए पत्र लिखा गया है।

वहीं तहसीलदार बसना नितिन ठाकुर ने कहा कि क्रॉप कटिंग के दौरान दर्ज मूल खसरा रकबे में वर्तमान में परिवर्तन हो चुका है और वहां नई फसल लगाई जा चुकी है, इसलिए मौके पर जाकर पूर्व की फसल का भौतिक सत्यापन संभव नहीं है। हालांकि उपलब्ध राजस्व एवं अन्य रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच की जा सकती है कि संबंधित किसान ने उस रकबे में कितना धान बेचा था। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी।

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