अनन्त चतुदर्शी के दिन शुभ मुहूर्त में हवन-पूजन के साथ विसर्जन का सिलसिला शुरू।

मुकेश कश्यप/कुरुद. ग्यारह दिनों की मंगलमय पूजा अर्चना के बाद आज अनन्त चतुदर्शी के दिन शुभ मुहूर्त में हवन-पूजन के पश्चात पूर्ण आहुति के साथ ही विसर्जन का सिलसिला भी शुरू हो गया है।भादो के पवित्र महीने में घर-घर विराजे बप्पा जी को लोगो ने मंगलवार को पूरी आस्था और भक्ति भावना के साथ विधिवत पूजन कार्य कर मंगलकामना की।हालांकि हवन का सिलसिला सोमवार से ही शुरू हो गया था और इसी के साथ कुछ स्थानों पर विसर्जन का दौर भी प्रारम्भ हुआ है।
नगर सहित अंचल में प्रथम पूज्य गणेश जी की भक्ति चरम पर रही।लोगो ने कोरोना काल के कठिन वक्त में भी अपनी आस्था को कम नही किया।इस बार व्यापक तौर पर सार्वजनिक जगहों की तुलना में घर-घर गणेश जी की स्थापना और पूजा अर्चना की विशेषता रही।सभी वर्ग ने अपने-अपने स्तर पर गणपति जी को पूरे भक्ति भाव के साथ ग्यारह दिनों तक पूजा अर्चना कर अपनी आस्था प्रकट की।
देवो में पहले पूजे जाने वाले गणपति जी की विशेषता यही है कि उसे हम किसी भी रूप से सृजन कर सकते है।उसका वाहक मूषक चंचलता का प्रतीक है।सिद्धिविनायक की भक्ति हमें मानवता और पशु-प्रेम का सन्देश देती है,वंही बल ,बुद्धि ,संस्कार एवं सम्मान को अपने व्यक्तित्व में ढालने की बातें भी कह जाती है।