बसना: भंवरपुर पुरैना तालाब में ‘मौत’ का अवैध कॉम्प्लेक्स, 55 कमरों का कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
भंवरपुर पुरैना तालाब में मौत का कॉम्प्लेक्स, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा,55 कमरों का जर्जर कॉम्प्लेक्स बना खतरा

देशराज दास बसना। महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत भंवरपुर में स्थित पुरैना तालाब पर अवैध निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। तालाब के ऊपर 55 कमरों का एक बड़ा कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया है, जिसे लेकर अब स्थानीय लोगों में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि यह पूरा निर्माण पूरी तरह अवैध है और वर्तमान में जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है, जिससे आम जनता के लिए कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर बरसात या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में यह कॉम्प्लेक्स गिरने का खतरा बना हुआ है।
ज्ञात हो इन दिनों अवैध कब्जे और निर्माण का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। तालाब की जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर 55 कमरों का एक विशाल व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया है, जिसका न तो कोई वैध रिकॉर्ड है और न ही किसी जिम्मेदार मालिक की जानकारी उपलब्ध है।
जानकारी के अनुसार, इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरी तरह से अवैध तरीके से किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि तालाब या जल स्रोतों पर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है, इसके बावजूद भंवरपुर में तालाब की जमीन पर नींव डालकर यह परिसर तैयार कर दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध निर्माण के पीछे पूर्व सरपंच और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत रही है। कब्जाधारियों को वैधता देने के नाम पर दुकानों का निर्माण कराया गया और बाद में इन दुकानों को 15 से 20 लाख रुपये में बेच दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह खरीद-फरोख्त उपतहसील कार्यालय और ग्राम पंचायत के सामने खुलेआम हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
रिकॉर्ड शून्य, जिम्मेदारी तय नहीं
ग्राम पंचायत भंवरपुर में इस 55 कमरों के कॉम्प्लेक्स से संबंधित कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। न तो निर्माण की अनुमति का दस्तावेज है और न ही कब्जे या आवंटन का कोई विवरण। इससे यह साफ होता है कि पूरा मामला गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
शिकायत मिलने पर तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे। साथ ही तत्कालीन पटवारी भंवरपुर द्वारा जांच प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें अवैध कब्जे की पुष्टि हुई। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
पटवारी जांच में 55 कमरों का खुलासा
तत्कालीन नायब तहसीलदार के निर्देश पर पटवारी भंवरपुर द्वारा की गई जांच में पाया गया कि उक्त कॉम्प्लेक्स में कुल 55 कमरे निर्मित हैं। यह निर्माण ग्राम के खसरा नंबर 819, रकबा 1.00 हेक्टेयर शासकीय भूमि (तालाब/पानी के नीचे की जमीन) पर किया गया है। जांच के दौरान ग्राम प्रमुख, कोटवार, कॉम्प्लेक्स के मालिक एवं किरायेदार उपस्थित रहे।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, कॉम्प्लेक्स के उत्तर दिशा में स्थित कमरा नंबर 1 से 13 तक का निर्माण ग्राम पंचायत की अटल व्यावसायिक योजना के तहत प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद किया गया था। इन कमरों से ग्राम पंचायत को राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।
जर्जर हालत, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
बिना किसी तकनीकी मापदंड और निगरानी के बने इस कॉम्प्लेक्स की हालत अब बेहद जर्जर हो चुकी है। स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि यह भवन कभी भी गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है। बावजूद इसके प्रशासन और पंचायत के जिम्मेदार लोग इस गंभीर खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं।
अवैध कब्जों से बाधित हो रहा आवागमन
भंवरपुर में अवैध कब्जों की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि मुख्य मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित होने लगा है। तालाब के आसपास की जमीन भी रसूखदारों के बीच बंट चुकी है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति का खुला दुरुपयोग हो रहा है।
शासकीय संपत्ति की भी हो रही खरीद-फरोख्त
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध कॉम्प्लेक्स से लगे शासकीय अटल व्यवसायिक परिसर की दुकानों को भी कुछ लोगों द्वारा नियमों के विरुद्ध बेच दिया गया है, जो अपने आप में एक आपराधिक कृत्य है। इसमें भी पंचायत के कुछ पदाधिकारियों की संलिप्तता की चर्चा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर मामले में प्रशासन कब जागेगा? क्या इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई होगी या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
इस संबंध में ग्राम पंचायत भंवरपुर सरपंच कृष्ण कुमार सिदार व सचिव भुवनेश्वर चौधरी ने बताया कि 55 कॉम्प्लेक्स में से केवल 13 कॉम्प्लेक्स परिसरों का ही किराया पंचायत में जमा होता है। बाकी लगभग 40 परिसरों का न तो पंचायत में कोई रिकॉर्ड है और न ही उनका किराया आता है। जिससे स्पष्ट होता है कि बाकी कॉम्प्लेक्स परिसर अवैध प्रतीत होता है