बसना

बसना: 100 दिन बाद भी नहीं बनी जांच टीम, फसल बीमा में अनियमितता की शिकायत पर प्रशासन मौन

देशराज दास बसना। तहसील बसना क्षेत्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल प्रयोग में कथित अनियमितता की शिकायत किए जाने के बावजूद 100 दिनों से अधिक समय बीत जाने पर भी प्रशासन द्वारा जांच टीम का गठन नहीं किए जाने से मामला चर्चा का विषय बन गया है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए शीघ्र निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत में बताया गया है कि जिला महासमुंद के ब्लॉक बसना के कई गांवों में खरीफ वर्ष 2025-26 के दौरान फसल बीमा योजना के तहत किए गए फसल प्रयोग में गड़बड़ी की आशंका है।

आवेदन के अनुसार धान सिंचित फसल के लिए ग्राम भैंसाखुरी, पिताईपाली, बड़ेडाभा, सोनामुंदी, अंकोरी, रूपापाली, छिर्राचुवां और बंसुलीडीह में प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन क्रमशः 1165.164, 1935.987, 1527.464, 1946.840, 1620.000, 1733.499, 1334.880 एवं 1877.760 किलोग्राम बताया गया है।

वहीं धान असिंचित फसल के लिए प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 851.400, 1583.988, 1396.048, 882.868, 522.360, 1151.280, 803.160 एवं 969.441 किलोग्राम दर्ज किया गया है, जिस पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए इसे जांच का विषय बताया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फसल प्रयोग से जुड़े कुछ अधिकारी-कर्मचारी किसानों को बीमा राशि दिलाने के नाम पर अनियमितता कर स्वयं लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही संबंधित क्षेत्रों में वास्तविक धान उत्पादन, किसानों द्वारा किए गए विक्रय तथा समर्पित रकबे की भी जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि खरीफ वर्ष 2024-25 में भी कुछ स्थानों पर औसत उत्पादन कम दर्शाकर बीमा राशि दिलाने की बात सामने आई थी, जिसकी भी जांच होना आवश्यक है।

100 दिन से बाद भी नहीं बनी जांच टीम
शिकायत किए जाने के बाद 100 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा इस मामले में न तो जांच टीम का गठन किया गया है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई है। इससे किसानों और शिकायतकर्ता में नाराजगी देखी जा रही है।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके और फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बनी रहे।

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