
बसना/सरायपाली: शिक्षण सप्ताह अंतर्गत ( 28/07/24) दिन रविवार शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेजेस सरायपाली महासमुंद छत्तीसगढ़ में समुदाय अभिभावक/पालक एवं विद्यार्थियों के मध्य नई शिक्षा नीति 2020 को इंट्रोड्यूस किया गया। कम्युनिटी अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के मध्य (10 + 2) के स्थान पर (5 + 3 + 3 + 4) स्ट्रक्चर वाली नई शिक्षा नीति को विस्तार से समझाया गया।
प्राचार्य मनोज पटेल जी,आत्मानंद विद्यालय परिवार एवं विकासखंड के अन्य शिक्षक साथी वीरेंद्र कर, शैलेंद्र नायक, प्रेम कुमार पटेल, अनिल प्रधान, द्वारा समस्त पालकों, अभिभावकों एवं समुदाय के लोगों को आमंत्रित किया गया था
इसी बीच नई शिक्षा नीति को जमीनी धरातल पर उताराने के लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित किया गया, नई शिक्षा नीति के बारे में बताया गया, एवम जागरूक की गई, प्राचार्य जी ने बताएं कि आगामी समय में किस प्रकार से नई शिक्षा नीति पूरे भारत में नई क्रांति लेगी एवं पस्ताकिया ज्ञान के साथ-साथ किस प्रकार से बच्चों में व्यावहारिक एवं प्रैक्टिकल नॉलेज को विकसित करेगी, विद्यार्थी न सिर्फ पस्ताकिया एवं सैद्धांतिक नॉलेज ग्रहण करेंगे बल्कि व्यावसायिक प्रैक्टिकल स्किल्स पर भी जोड़ दिया गया है,
उन्होंने समुदाय एवं अभिभावकों के बताया कि पहले हमारे विद्यालय में 12 साल तक बच्चों को विद्यालय की देखरेख में रखा जाता था अब आने वाले नए शिक्षा नीति में यह स्पष्ट कर दी गई है कि हम विद्यालय में अब बच्चों को 15 साल तक देख-रेख करेंगे एवं उनका व्यावहारिक एवं व्यावसायिक नॉलेज को भी डेवलप करके उनको हर क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट करके, कॉलेज में जाने के लिए उत्साहित करेंगे, उन्होंने यह भी बताया कि अब कोई भी स्ट्रीम नहीं रहेगी जैसे (आर्ट, बायो, कॉमर्स, एग्रीकल्चर, साइंस मैथ्स,) उन्होंने बताया कि
.पहले 5 वर्ष का जो स्ट्रक्चर (5+3+3+4) है इसमें बच्चे नर्सरी, PP1, PP2, क्लास 1 और क्लास 2 तक विद्यालय में अध्ययन करेंगे इसमें किसी भी प्रकार का एग्जाम नहीं होगा/
नेक्स्ट 3 वर्ष(5+3+3+4 )कक्षा तीसरी चौथी एवं पांचवी तक विद्यालय में अध्ययन करेंगे जिसमें मुख्य रूप से स्थानीय भाषा एवं मातृभाषा पर जोर दिया गया है/
अगले तीन ,(5+3+3+4)वर्ष में बच्चे कक्षा छठवीं, सातवीं आठवीं ,तक अध्ययन करेंगे इसमें मुख्य रूप से एक लैंग्वेज के साथ-साथ कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा को महत्व दी गई है/
अगले 4 वर्ष( 5+3+3+4)वर्ष तक बच्चे कक्षा 9वी 10वीं 11वीं एवं 12वीं में अध्ययन करेंगे जिसमें कोई भी सरिता नहीं होगा जैसे पहले हुआ करता था साइंस बायो मैथ्स एग्रीकल्चर अब से इन विषयों के लिए अलग से स्ट्रीम की व्यवस्था नहीं होगी कोई भी बच्चे कोई भी विषय को चुनकर के विद्यालय में अध्ययन पूर्ण करेंगे.
कक्षा नौवीं से ही विद्यार्थियों को विषय चुनने की आजादी रहेगी इसमें वह एक लैंग्वेज की भाषा की भी पढ़ाई कर सकते हैं और किसी भी विषय को चुन करके विद्यार्थी आगे कॉलेज स्तर तक पहुंच सकते हैं।
अंतिम 4 वर्ष पूर्ण करने पर आगे कॉलेज या महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में उनके लिए किसी भी प्रकार की स्ट्रीम नहीं रहेगी या तो ग्रेजुएशन(सर्टिफिकेट; डिप्लोमा, डिग्री, और रिसर्च होगी)
ग्रेजुएशन कहलाएगा या पोस्ट ग्रेजुएट या फिलासफी आफ डॉक्टर कहलाएगा । उन्होंने आगे बताया कि सरकार एवं शासन नई शिक्षा नीति के इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के लिए कुल जीडीपी का 6% उपयोग करेगा जबकि पूर्व में शिक्षा को केवल तीन प्रतिशत खर्च करने का नियम था, पलकों अभिभावकों एवं समुदाय को बताया कि आने वाले वर्षों में हमारी नई शिक्षा नीति के कारण पूरे भारतवर्ष में नहीं क्रांति का उदय होगा और आने वाले वर्षों में हमारे विद्यार्थी न सिर्फ डॉक्टर इंजीनियर टीचर नेता बनेंगे बल्कि एक अच्छे वैज्ञानिक एक अच्छे नागरिक बन सकते हैं।