सरायपाली

क्षेत्र के धान कोचिए सक्रिय,दूसरे जिले से आने वाले धान को रोकने के लिए किसी तरह की नाकेबंदी नहीं

सरायपाली/बसना: एक नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी सहकारी समितियों के धान उपार्जन केंद्रों में प्रारंभ हो चुकी है। खरीदी को लेकर प्रशासन द्वारा तैयारी की जा रही है। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी प्रारम्भ होते ही क्षेत्र के कोचिए सक्रिय हो गए हैं। अन्तर्राज्यीय धान तस्करी को रोकने बंजारी नाका, पालीडीह एवं जंगलबेड़ा बॉर्डर पर बैरियर बनाए गए हैं। जहां पर मंडी बोर्ड के कर्मचारी, पुलिस विभाग, स्थानीय ग्राम पंचायत सचिव एवं अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मगर दूसरे जिले से आने वाले धान को रोकने के लिए किसी तरह की नाकेबंदी नहीं की गई है।

धान व्यापारियों के गोदामों का भौतिक सत्यापन भी नहीं की जा रही है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी इस वर्ष 1 महीना पूर्व होने के कारण किसानों में भारी उत्साह है। मगर इस समय धान को पकने में अभी समय लगेगा। शुरू के एक-दो हफ्ते धान की आवक कम हो सकती है। ऐसे में कोचिए बाहर से धान लाकर खपाने के फिराक में हैं। कोचियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन के पास कोई कारगर उपाय नहीं है। क्योंकि कोचिये दूसरे किसानों के पट्टे में धान खपाने का काम करते हैं। कोचिए काफी शातिर होते हैं।

किसानों को कमीशन देकर ग्रेडिंग के समय धान उपार्जन केंद्रों में खड़े कर धान को खपा लेते हैं। सरसीवां, सारंगढ एवं बिलाईगढ़ क्षेत्र से बड़ी तादाद में दूसरे जिले से धान महासमुंद जिले में पंहुचता है। उसे रोकने के लिए कोई बेरियर न होने के कारण बेधड़क इस क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों में धान खपाया जाता है। सीमावर्ती सोसायटियों के धान उपार्जन केंद्रों में विशेष चौकसी बरतने की आवश्यकता है।

इस कार्य में समितियों के प्रबंधक, कर्मचारी, मंडी के कर्मचारियों एवं कोचियों की आपसी मिलीभगत होती है। प्रशासन द्वारा धान व्यापारियों के गोदामों का भी स्टॉक जांच नहीं करने से मनमानी धान की खरीदी जाती है और उस धान को फिर धान उपार्जन केंद्रों में खपाया जाता है। समय रहते इस पर अगर अंकुश नहीं लगा तो किसानों के धान से ज्यादा कोचियों के धान बिकेंगे और उसका सीधा लाभ किसानों की बजाय कोचियों को मिलेगा। जिसे लेकर प्रशासन को गंभीरता दिखाने की जरूरत है।

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