राहुल की मोदी को खुली चुनौती- डरिए मत…राहुल ने PM मोदी को फिर दिया डिबेट का चैलेंज, शाह बोले- पहले हमसे तो मिल लीजिए

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस (डिबेट) की चुनौती दी है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी करीब डेढ़ मिनट के वीडियो में राहुल ने कहा कि उनके चैलेंज को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद की जगह और मंच चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें खुलकर बहस के लिए सामने आना चाहिए।
राहुल गांधी ने किन मुद्दों पर बहस की चुनौती दी?
राहुल गांधी ने कहा, “आप कहते हैं कि विपक्ष देशद्रोही है। आइए, बहस करते हैं कि देशद्रोही कौन है? विदेशी ताकतों से संबंध किसके हैं और किस तरह के हैं?” उन्होंने बहस के दौरान कई गंभीर मुद्दे उठाने की बात कही। इनमें देश का फाइनेंशियल सिस्टम, अमेरिका के साथ हुई डील, कैबिनेट को इसकी जानकारी न देना, उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़ा मामला और एपस्टीन प्रकरण शामिल हैं।
राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि उनके खिलाफ अब तक करीब 45 मानहानि के मामले दर्ज हैं, लेकिन विदेशी कनेक्शन के मुद्दे पर मानहानि का केस क्यों नहीं किया जा रहा। वीडियो के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “आ जाइए, डरिए मत।”
अमित शाह का पलटवार- संसद में चर्चा करके दिखाइए
राहुल गांधी की चुनौती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार विशेष सत्र बुलाकर SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन पर भी चर्चा करने को तैयार है।
शाह ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने नकली संसद बनाकर असली संसद का मजाक उड़ाया है। अगर उनमें हिम्मत है तो संसद में देश की जनता के सामने चर्चा करें। उन्होंने कहा कि केवल हाथ में संविधान लेकर घूमने से संवैधानिक मूल्यों का समर्थन नहीं होता, बल्कि आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए।
PM मोदी को पहले भी कई बार चुनौती दे चुके हैं राहुल
राहुल गांधी इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी को अलग-अलग मुद्दों पर बहस की चुनौती दे चुके हैं।
2024 लोकसभा चुनाव से पहले: पूर्व न्यायाधीशों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा, अडाणी और इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे मुद्दों पर बहस का प्रस्ताव रखा। राहुल की ताजा चुनौती और अमित शाह के जवाब के बाद एक बार फिर संसद के बाहर और भीतर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।