भाजपा का नारा ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ आखिर किसके खिलाफ और क्यों? – मोक्ष कुमार प्रधान
केंद्र और राज्यों में सत्ता होने के बावजूद लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी? भाजपा पहले अपने नारे और अभियान का जवाब जनता को दे – मोक्ष कुमार प्रधान

छत्तीसगढ़ भूमि न्यूज़ बसना। बसना विधानसभा क्षेत्र के सक्रिय कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने भारतीय जनता पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा आखिर किससे लोकतंत्र को बचाने और किसकी अराजकता हटाने की बात कर रही है? देश में केंद्र की सत्ता भाजपा के पास है और कई राज्यों में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि लोकतंत्र को खतरा किससे है और अराजकता फैलाने वाला कौन है?
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि भाजपा के पास आज जनता के बीच जाकर बताने के लिए विकास, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, युवाओं के रोजगार और आम आदमी की समस्याओं पर ठोस जवाब देने के बजाय राजनीतिक नारों और आरोप-प्रत्यारोप का सहारा लेने की स्थिति बन गई है। जनता के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नए-नए अभियान चलाए जा रहे हैं। भाजपा को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र केवल रैली निकालने, नारे लगाने और सत्ता में बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ जनता की आवाज सुनना, विपक्ष को सम्मान देना, सवालों का जवाब देना और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी लगातार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी जी का स्पष्ट कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता की आवाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष इन सवालों को जनता के सामने रखने का लोकतांत्रिक अधिकार रखता है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने सवाल किया कि जब राहुल गांधी जी चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाते हैं, तब भाजपा उन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा करने में क्यों जुट जाती है? यदि लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित है तो विपक्ष के सवालों का जवाब देने में परेशानी क्यों? यदि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी है तो उस पर उठने वाले सवालों का समाधान सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं किया जाता?
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अराजकता नहीं है, जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाना अराजकता नहीं है, किसानों के हक में आंदोलन करना अराजकता नहीं है और महंगाई, बेरोजगारी तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना कोई अपराध नहीं है। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं को सदन से लेकर सड़क तक उठाना है।
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि भाजपा को यह भी बताना चाहिए कि क्या सरकार की आलोचना करना अराजकता है? क्या बेरोजगार युवाओं का रोजगार मांगना अराजकता है? क्या किसान का अपनी फसल के उचित दाम और मुआवजे की मांग करना अराजकता है? क्या महंगाई से परेशान आम नागरिक का सरकार से जवाब मांगना अराजकता है? यदि नहीं, तो फिर इस नारे के माध्यम से आखिर किसे निशाना बनाया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र की परिभाषा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार तय नहीं करनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निष्पक्ष चुनाव और मजबूत विपक्ष बेहद जरूरी हैं। राहुल गांधी जी जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की रक्षा की बात कर रहे हैं, उन सवालों पर भाजपा को राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय देश की जनता के सामने स्पष्ट जवाब रखना चाहिए।
अंत में मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों का अधिकार है। लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछने वाला देशद्रोही या अराजकतावादी नहीं होता, बल्कि सवाल पूछना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। भाजपा नारे लगाने से पहले यह बताए कि लोकतंत्र को बचाने की जरूरत क्यों महसूस हुई और जनता के सवालों का जवाब कौन देगा? देश की जनता केवल नारे नहीं, जवाबदेही, पारदर्शिता और अपने अधिकारों की सुरक्षा चाहती है।