बसना: रजिस्ट्री कर जमीन बेच दी, फिर भाई के नाम करा दी खातेदारी?
तीन साल से खरीदार भटक रहा, 2023 में खरीदी जमीन पर अब विक्रेता के भाई का दावा, एसडीएम आदेश के बाद कब्जे को लेकर टकराव

बसना l बसना तहसील के ग्राम जेवरा में जमीन की रजिस्ट्री के बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने खरीदार के अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरीदार का आरोप है कि विक्रेता ने वर्ष 2023 में अपनी भूमि बताकर उसकी रजिस्ट्री कर दी, लेकिन रजिस्ट्री के बाद उसी जमीन पर विक्रेता के भाई ने खातेदारी का दावा पेश किया और वर्ष 2024 में एसडीएम न्यायालय के आदेश से उसका नाम फिर खातेदार के रूप में दर्ज हो गया।
अब खरीदार अपनी ही खरीदी जमीन के अधिकार और प्रमाणीकरण के लिए न्यायालय के चक्कर लगा रहा है। मामला ग्राम जेवरा के खसरा नंबर 408, रकबा 0.51 हेक्टेयर का है। दस्तावेजों के अनुसार आनंद कुमार तांडी पिता मोहित ने उक्त भूमि को नरेश कुमार नायक पिता उमर सिंह नायक को 1 लाख रुपए में विक्रय किया। भूमि का बाजार मूल्य 1 लाख 53 हजार रुपए दर्ज है। 11 जुलाई 2023 को बसना उप-पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री हुई। खरीदार के मुताबिक रजिस्ट्री के बाद उसने वर्ष 2023-24 में भूमि पर कब्जा कर फसल लगाई। इसके बाद विक्रेता के भाई श्याम कुमार ताण्डी ने इसी जमीन में अपना नाम खातेदार के रूप में दर्ज कराने के लिए एसडीएम न्यायालय में अपील की।
रजिस्ट्री के बाद सामने आया 1996 का नामांतरण विवाद
एसडीएम न्यायालय के 23 जुलाई 2024 के आदेश में उल्लेख है कि खसरा नंबर 408 की भूमि पूर्व में श्याम कुमार ताण्डी और आनंद ताण्डी के संयुक्त स्वामित्व में थी। वर्ष 1996 में नामांतरण पंजी के माध्यम से श्याम कुमार का नाम हटाकर आनंद ताण्डी के नाम दर्ज किया गया था। बाद में आनंद ताण्डी ने न्यायालय के समक्ष श्याम कुमार का नाम खातेदार के रूप में दर्ज किए जाने पर आपत्ति नहीं होने की बात स्वीकार की। इसके आधार पर एसडीएम न्यायालय ने श्याम कुमार ताण्डी की अपील स्वीकार करते हुए उसका नाम खातेदार के रूप में दर्ज करने और पटवारी अभिलेख अद्यतन करने का आदेश दिया।
सवाल- रजिस्ट्री से पहले विवाद की जानकारी थी तो खरीदार को क्यों नहीं बताया?
यही पूरा मामला अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। यदि भूमि के पुराने अभिलेख में विक्रेता के भाई का संयुक्त स्वामित्व दर्ज था और बाद में नाम हटाए जाने को लेकर विवाद मौजूद था, तो 11 जुलाई 2023 को जमीन बेचते समय खरीदार को इसकी जानकारी दी गई थी या नहीं? खरीदार का कहना है कि उसे ऐसे किसी विवाद की जानकारी नहीं थी। रजिस्ट्री के बाद अब 2024-25 और 2025-26 में दोनों पक्षों द्वारा भूमि पर कब्जे का दावा किया जा रहा है। इससे खरीदार के सामने न केवल कब्जे बल्कि खरीदी गई भूमि के अधिकार को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मामले में खरीदार नरेश कुमार नायक ने न्याय की गुहार लगाते हुए व्यवहार न्यायालय बसना में वाद दायर किया है। अब न्यायालयीन प्रक्रिया में यह तय होना है कि रजिस्ट्री के बाद खरीदार के अधिकारों की स्थिति क्या होगी और पुराने नामांतरण विवाद का प्रभाव बिक्री पर कितना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि भूमि के विक्रेता आनंद कुमार के शासकीय शिक्षक होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में खरीदार का पक्ष है कि जमीन बेचने से पहले उससे जुड़े सभी पुराने अभिलेख और विवाद की स्थिति स्पष्ट करना विक्रेता की जिम्मेदारी थी।