बसना
बसना। श्री परशुराम युवा वाहिनी बसना द्वारा ‘नुआखाई भेंट-घाट’ का भव्य आयोजन; नन्हे कलाकारों के सुरम्य भजनों से गूंजा प्रांगण


बसना। पश्चिम ओडिशा और छत्तीसगढ़ अंचल की साझा लोक-संस्कृति, समरसता तथा कृषि परंपरा का पावन लोकपर्व ‘नुआखाई’ नगर में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस मांगलिक अवसर पर ब्राह्मण नवयुवक संघ बसना के बैनर तले एवं विप्र मातृ संगठन बसना के विशेष सहयोग से श्री परशुराम युवा वाहिनी बसना द्वारा पारंपरिक ‘नुआखाई भेंट-घाट’ एवं सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन श्री हरि लक्ष्मी विप्र भवन बसना में किया गया।
धरती माता के प्रति कृतज्ञता और नव-अन्न वंदन का यह उत्सव लोक-चेतना तथा सामाजिक एकात्मता का प्रतीक बना। वरिष्ठजनों के चरण-स्पर्श कर ‘नुआखाई जुहार’ के साथ आशीर्वाद लेने का पारंपरिक क्रम आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का सार्थक संदेश दिया। भजन विधा पर आधारित नृत्यों से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मनमोह लिया । कु. शरण्या शर्मा के मंत्रोच्चार से भजन नृत्य का शुभारम्भ हुआ, अक्षत त्रिपाठी, वात्सल्य दास(अंश), कु.अंशिका त्रिपाठी और कु. ईशा दास ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के बच्चों द्वारा भक्ति रस से परिपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय मर्यादा में आबद्ध भजनों के गायन ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। बाल कलाकारों ने भगवान श्री गणेश की वंदना, भगवान परशुराम स्तुति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम व शिव भजनों की ऐसी अविरल गंगा बहाई कि संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। बच्चों के सुर, लय, ताल और भावपूर्ण नृत्य की प्रशंसा करते हुए अतिथियों ने कहा कि भक्ति केवल पूजा-अर्चना नहीं, अपितु आत्मा का परिष्कार और संस्कृति का संवाहक है।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नुआखाई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और श्रम के प्रति नमन का लोक-दर्शन है। जब नई फसल घर आती है, तब समाज अपने मतभेदों को भुलाकर प्रेम, सौहार्द और स्नेह के सूत्र में बंधता है। ब्राह्मण समाज के नन्हे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन विधा हमारी सनातन परंपरा के संरक्षण और संवर्धन का जीवंत प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में भाग लेने वाले सभी बाल कलाकारों को स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। आयोजन में समाज के वरिष्ठजन, युवा साथी, मातृशक्ति तथा समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।