महासमुंद/बसना: चक्रवात अर्नब ने बदला मौसम का मिजाज, बारिश से किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट,तेज हवाओं ने बढ़ाई किसानों की चिंता

छत्तीसगढ़ भूमि न्यूज़ महासमुंद/बसना। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्नब का असर दूसरे दिन बसना क्षेत्र में ज्यादा देखने को मिला। मंगलवार की तुलना में बुधवार को मौसम का मिजाज बदला नजर आया। सुबह से शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। दिनभर बूंदाबांदी और हल्की बारिश होती रही, जबकि शाम को बारिश ने तेज रफ्तार पकड़ ली। इसके साथ ही सर्द हवाएं चलने लगीं, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई। लगातार बदलते मौसम ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
चक्रवाती तूफान के प्रभाव और संभावित खराब मौसम को देखते हुए महासमुंद जिला प्रशासन ने 29 अक्टूबर को जिले के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में छुट्टी घोषित कर दी है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय मौसम की गंभीरता और प्रशासन की सतर्कता को दर्शाता है। वहीं, बसना क्षेत्र में भी बारिश और तेज हवाओं के कारण जनजीवन के साथ कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
खेतों में बिछी धान की फसल, मेहनत पर पानी फिरने का डर
क्षेत्र के कई गांवों में धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में तेज बारिश और हवा के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछने लगी है। किसानों के सामने अब फसल को सुरक्षित रखने और कटाई समय पर करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय बारिश होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। खेतों में पानी भरने और फसल गिरने से कटाई में देरी हो सकती है। वहीं जमीन पर बिछी धान की फसल को काटने में अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। लगातार बारिश होने पर धान की गुणवत्ता प्रभावित होने और उपज में कमी आने का भी डर है।
लागत और मेहनत पर संकट, आर्थिक नुकसान की आशंका
इस बार किसानों ने धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च किया है। महीनों की मेहनत के बाद जब फसल कटाई के लिए तैयार हुई, तब मौसम की बेरुखी ने चिंता बढ़ा दी है।
अत्यधिक और अनियोजित बारिश से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान होने पर किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा, तो किसानों को उत्पादन में कमी के साथ आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। खेतों में गिरी धान की फसल को उठाने और सुरक्षित करने में भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी।
सरना और 101 धान लगाने वाले किसानों को राहत
बारिश के बीच कुछ किसानों के लिए मौसम लाभकारी भी साबित हुआ है। जिन किसानों ने सरना, 101 सहित कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों की खेती की है, उन्हें अपेक्षाकृत राहत मिली है। इन किस्मों की फसल पहले से तैयार होने के कारण किसान कटाई और फसल सुरक्षित करने की स्थिति में हैं।
हालांकि, खेतों की स्थिति और फसल की परिपक्वता के अनुसार बारिश का असर अलग-अलग देखने को मिल रहा है। बड़ी किस्मों और देर से तैयार होने वाली धान की फसल लगाने वाले किसानों की चिंता अधिक बनी हुई है। ऐसे किसानों के लिए बारिश के बीच फसल को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती बन गया है।
24 घंटे सक्रिय रहेगा आपदा नियंत्रण कक्ष
चक्रवाती तूफान और संभावित भारी बारिश को देखते हुए बसना प्रशासन पहले से सतर्क है। एसडीएम हरिशंकर पैकरा के निर्देश पर जनपद पंचायत बसना के सभाकक्ष में आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। नायब तहसीलदार ललित सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। 27 से 30 अक्टूबर तक अधिकारियों और कर्मचारियों की तीन पालियों में ड्यूटी लगाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य बारिश और तेज हवा से उत्पन्न परिस्थितियों पर नजर रखना तथा जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करना है। आपदा संबंधी सूचना मिलने पर तत्काल नोडल अधिकारी को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्कूलों में छुट्टी, प्रशासन अलर्टमौसम की स्थिति को देखते हुए महासमुंद जिले के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में 29 अक्टूबर को छुट्टी घोषित की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। वहीं, संभावित भारी बारिश और तेज हवाओं के मद्देनजर आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।
अब मौसम पर टिकी किसानों की नजर
दूसरे दिन बारिश का असर बढ़ने के बाद किसानों की नजर अब आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है। खेतों में तैयार धान को जल्द सुरक्षित करने की चिंता के बीच किसान बारिश थमने और मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं। यदि लगातार बारिश होती है, तो फसल नुकसान का दायरा बढ़ने की आशंका है। ऐसे में किसानों के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।