मां-बेटी हत्याकांड: तीन दोषियों को मृत्युदंड, चौथे को उम्रकैद; अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला
प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, चारों आरोपी दोषी करार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रधान आरक्षक की पत्नी और उसकी नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी माना।
अदालत ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मौत की सजा सुनाई, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। फैसला जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत में सुनाया गया।
13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी वारदात
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। पुलिस के अनुसार सूरजपुर में पदस्थ तत्कालीन प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी नाबालिग बेटी की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े वैज्ञानिक एवं अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। रिपोर्ट के अनुसार मृतक महिला के शरीर पर चोट के 33 निशान और बच्ची के शरीर पर 28 चोटों के निशान पाए गए थे। आरोपियों के कपड़ों पर मिले रक्त संबंधी साक्ष्य और फिंगरप्रिंट को भी अभियोजन की ओर से महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
अदालत ने मामले को माना अत्यंत गंभीर
अदालत ने अपराध की गंभीरता, पीड़ितों की असहाय स्थिति और घटना की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तीन आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी के अपराध के रूप में देखा।
चौथे आरोपी को आजीवन कारावास
मामले में दोषी ठहराए गए चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं तीन अन्य दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। इस फैसले के बाद बहुचर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई का प्रमुख चरण पूरा हो गया है।
2024 की वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था
प्रधान आरक्षक के परिवार के साथ हुई इस घटना के बाद सूरजपुर सहित पूरे प्रदेश में आक्रोश का माहौल बना था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में कई तरह के साक्ष्य जुटाए गए और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।