3 माह तक शिकायत, कार्रवाई नहीं हुई तो भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, तोड़ा निर्माण

बसना। थाना क्षेत्र के ग्राम भठोरी में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के भंवरपुर मोड़ पर जमीन विवाद ने सोमवार को उग्र रूप ले लिया। खसरा नंबर 313/2 की भूमि को ग्रामीण शासकीय जमीन बताते हुए करीब तीन माह से तहसीलदार और कलेक्टर से निर्माण रोकने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आक्रोशित सैकड़ों महिला-पुरुष मौके पर पहुंचे और निर्माणाधीन मकान को तोड़ दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन पर वर्ष 2017 में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो चुकी थी। इसके बाद दोबारा अस्थायी होटल और अन्य ठेले लगाए गए तथा धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया। अब पक्का निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मौके पर फोटो और वीडियो बनाने से भी रोकने का प्रयास किया गया।
पुलिस पहुंची, समझाइश के बाद लौटे ग्रामीण
मामले की जानकारी मिलते ही बसना पुलिस सक्रिय हुई। दोपहर करीब 3 बजे थाना प्रभारी शरद दुबे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए कानून हाथ में नहीं लेने और विवाद का समाधान प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया से कराने की बात कही। बताया गया कि शुरुआती दौर में ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। काफी समझाइश के बाद वे शांत हुए और अपने-अपने घर लौटे। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।
जमीन मालिक ने लगाया मारपीट व तोड़फोड़ का आरोप
इधर, मनोज कुमार यादव ने थाना बसना में शिकायत देकर बताया कि खसरा नंबर 313/2 की 411.53 वर्गमीटर भूमि उन्हें शासन से भूमिस्वामित्व हक में प्राप्त हुई है और उनके पास पट्टा भी है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व न्यायालयीन प्रकरण में उनके पक्ष में फैसला हुआ है तथा निर्माण पर रोक संबंधी आवेदन का भी निराकरण हो चुका था। यादव ने शिकायत में आरोप लगाया कि 28 सितंबर को ग्रामीणों के समूह ने उनकी भूमि में घुसकर निर्माणाधीन मकान तोड़ दिया। मजदूरों-मिस्त्रियों से मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी और नाबालिग पुत्री के साथ भी दुर्व्यवहार तथा पुत्री को ईंट और डंडे से मारने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
अब जांच पर टिकी नजर
एक ही जमीन पर ग्रामीणों द्वारा शासकीय भूमि होने का दावा और दूसरी ओर मनोज यादव द्वारा शासन से मिले भूमिस्वामित्व पट्टे का दावा किए जाने से मामला गंभीर हो गया है। अब राजस्व रिकॉर्ड, पट्टा, पूर्व न्यायालयीन आदेश और मौके की स्थिति की जांच के बाद ही जमीन की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।