
पिथौरा/बसना। सूचना का अधिकार अधिनियम में 30 दिवस के भीतर में सूचना दस्तावेज प्रदाय कराने का नियम है। इसके बाबजूद जनसूचना अधिकारी जानबुझकर लापरवाही बरत रहे है। हैरत की बात है कि चार-चार जनसूचना अधिकारी बदल गए। लेकिन सूचना दस्तावेज आवेदक को नही मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने दो प्रकरण में पचास हजार रूपए का अर्थदंड लगाया है। उक्त राशि जनसूचना अधिकारी के वेतन से कटौती होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत पिपरौद जपं पिथौरा से 19 जुलाई 2018 को दो पृथक पृथक सूचना आवेदन लगाकर सूचना दस्तावेज की मांग किया। समय सीमा में सूचना उपलब्ध नही कराने पर आवेदक ने 13 सितम्बर 2018 को सीईओ जनपद पंचायत पिथौरा में प्रथम अपील किया। प्रथम अपील में आवेदक को निःशुल्क सूचना दस्तावेज प्रदाय कराने का आदेश पारित हुआ।
जनसूचना अधिकारी ने प्रथम अपील पारित आदेश का पालन नही किया। जिस वजह से छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में दिनांक 10 दिसम्बर 2018 को द्वितीय अपील दायर की गई। मुख्य सूचना आयुक्त एम के राउत ने दोनो प्रकरण में दिनांक 23 अगस्त 2021 को सुनवाई में पाया कि अपीलार्थी को समयसीमा में सूचना उपलब्ध नही कराया गया। जो सूचना का अधिकार अधिनियम के विपरीत है। इसलिए दोनो प्रकरण में पच्चीस.पच्चीस हजार रूपये का जुमार्ना कराने का आदेश पारित किया। सीईओ जनपद पंचायत पिथौरा को 50 हजार जुर्माना राशि जनसूचना अधिकारी हरिचरण चौहान के वेतन से कटौती करवाकर शासकीय कोष में जमा करके उसकी पावती सूचना आयोग में भेजने का निदेर्शित किया है।
यहां बताना जरूरी है कि इस पंचायत में सूचना आवेदन प्रस्तुत करने के दौरान हरिचरण चौहान सचिव के प्रभार में था। उसके बाद क्रमश सत्यानंद बाघ, रेखराज साहु एवं वतर्मान में हेमलता साहु सचिव प्रभार में है। इसके बाबजूद भी आज पर्यन्त तक आरटीआई कार्यकर्ता विनोद दास को मांगी गई सूचना दस्तावेज उपलब्ध नही कराया गया है।
सूचना आयोग में सचिव हरिचरण चौहान ने बताया कि उन्हे पूर्व सचिव सुभाष साहु ने प्रभार में समस्त अभिलेख नही दिया था। इसलिए आवेदक को सूचना दस्तावेज उपलब्ध करवा नही पाया। हरिचरण चौहान ने पूर्व सचिव सुभाष साहु द्वारा प्रभार संबंधी समस्त अभिलेख प्राप्त नही होने के उपरान्त भी सीईओ जनपद पंचायत पिथौरा एवं सीईओ जिला पंचायत महासमुन्द को नियमानुसार कोई सूचना नही दिया। ना उक्त संबंध में पत्राचार किया। इसलिए मुख्य सूचना आयुक्त ने जनसूचना अधिकारी का इस तर्क को मान्य नही किया।