छग में टीकाकरण को आरक्षण का नाम देनी वाली भाजपा ने केंद्र में मनरेगा में किया इंसान को इंसान से बांटने का काम : अंकित

बागबाहरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के प्रथम अध्यक्ष व वरिष्ठ कांग्रेसी अंकित बागबाहरा ने बताया कि छग में टीकाकरण को आरक्षण का नाम देनी वाली भाजपा ने केंद्र में मनरेगा में किया इंसान को इंसान से बांटने का काम किया है ।
अंकित ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने 1 अप्रेल से मनरेगा में एक मनमाना नियम लागू किया है जिसके तहत लगता है भविष्य में केंद्र अब सभी मजदूरों को मजदूर नही मानेगा अब उसने एक अप्रेल से नया नियम लागू किया है जिसके तहत भुगतान को एस सी, एस टी, व अदर में बांटा है,अदर में एस सी, एस टी को छोड़ कर समस्त जाति आती है , जिसके कारण मनरेगा के भुगतान व एंट्री में एक नई समस्या शुरू हो गयी है ।
अंकित ने बताया कि इस वर्ष एक अप्रेल के बाद 26 अप्रैल को अदर वर्ग के श्रमिकों के भुगतान के लिए 241 करोड़ 80 लाख रूपए,5 मई अनुसूचित जाति के श्रमिकों के लिए पांच करोड़ 26 लाख रूपए11 मई अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों के लिए 122 करोड़ नौ लाख रूपए कि राशि ही जमा हो पाई है अभी बैंकों कोएस सी, एस टी के खातों को जाति के आधार में बांटने में बहुत समय लगने वाला है जिसे पी एफ एम एस मैपिंग कहा जाता है ।
अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति मद के नए खुले खातों को पी.एफ.एम.एस. में मैपिंग करने का कार्य पूरा नही होने के कारण
आ रही भुगतान की भारी समस्या के निवारण के लिये तत्काल छत्तीसगढ़ राज्य शाशन ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा है । अंकित ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 तक मनरेगा में कार्यरत सभी वर्ग के श्रमिकों का मजदूरी भुगतान एक नोडल खाते से एन.ई.एफ.एम.एस. (NEFMS) के माध्यम से हो रहा था। वर्गवार भुगतान संबधी परिवर्तन के कारण ग्रामीण विकास मंत्रालय स्तर पर राज्यों हेतु नामित डी.डी.ओ. को एक दिन में ही बहुत अधिक एफ.टी.ओ. पर डिजिटल हस्ताक्षर करने पड़ रहे हैं तथा वर्तमान में लॉक-डाउन के कारण उन्हें यह कार्य सीमित संसाधनों के साथ घर से करना पड़ रहा है, इसलिए इसमें और अधिक समय लग रहा है।
अंकित ने केंद्र से मांग की कि अगर इस वर्गीकरण में आपकी मंशा अच्छी है तो इनको वर्गीकरण के आधार पर परेशान न किया जाए और ना ही इनमें भेदभाव किया जाए । अगर वर्गीकरण करना ही है और आप एस सी व एस टी वर्ग का भला चाहते हैं तो उनकी मजदूरी दर बढ़ा दीजिए अगर ऐसा नही करने वाले है तो आप का उद्देश्य राज्यों को सिर्फ परेशान करना है जिसे वापस लेना चाहिए ।