बसना

बसना: जहां था अतिक्रमण, वहां अब लहलहाएगा जंगल… 25 एकड़ भूमि को फिर से हराभरा बनाने का संकल्प, 500 पौधों से हुई नई शुरुआत

आमाखार गौशाला में पूजा-अर्चना के साथ हुआ पौधारोपण, ग्रामीणों ने कहा पेड़ नहीं, आने वाली पीढ़ियों का भविष्य रोप रहे हैं

देशराज दास बसना।अतिक्रमण की जकड़न में दम तोड़ रही शासकीय भूमि पर अब हरियाली की नई उम्मीद अंकुरित हो चुकी है। बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत बिरसिंगपाली के आश्रित ग्राम बुधूडोंगर स्थित आमाखार गौशाला में ग्रामीणों की जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का ऐसा अभियान शुरू हुआ, जो आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।25 एकड़ शासकीय भूमि को फिर से घने जंगल में बदलने के संकल्प के साथ पहले चरण में अतिक्रमण मुक्त कराई गई 15 एकड़ भूमि पर 500 फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया गया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने पूजा-अर्चना एवं पौधारोपण कर प्रकृति के प्रति आस्था और संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनपद सदस्य कालिंदी मुन्ना अग्रवाल तथा अध्यक्षता ग्राम पंचायत बिरसिंगपाली की सरपंच मीराबाई भागरथी पटेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपसरपंच नंदकुमारी जगत, पुष्पा जगत, प्रेमलाल एवं धनमोती चौहान उपस्थित रहे।

पौधारोपण के दौरान पीपल, आम, जामुन, करंज, आंवला, कटहल, इमली, बेर, अमेंरा, सीताफल एवं सराई सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। प्रत्येक पौधे के संरक्षण का दायित्व भी ग्रामीणों ने स्वयं लेने का संकल्प किया। मुख्य अतिथि जनपद सदस्य कालिंदी मुन्ना अग्रवाल ने कहा कि प्रकृति को बचाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम पौधारोपण है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक उसका संरक्षण है। आज लगाया गया एक पौधा भविष्य में हजारों लोगों को शुद्ध हवा, छाया और जीवन देगा। यह अभियान केवल हरियाली बढ़ाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने का प्रयास है।

सरपंच मीराबाई भागरथी पटेल ने कहा कि आमाखार का यह क्षेत्र कभी घने जंगल के रूप में जाना जाता था। समय के साथ अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई से इसकी हरियाली समाप्त हो गई। ग्राम पंचायत और ग्रामीणों का सपना है कि इस पूरे क्षेत्र को फिर से प्राकृतिक स्वरूप दिया जाए। उन्होंने बताया कि 25 एकड़ शासकीय भूमि में से 15 एकड़ भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जा चुकी है, जबकि शेष 10 एकड़ भूमि को भी शीघ्र मुक्त कर वहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक चेतना का परिणाम है। यदि हर ग्रामीण एक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित करेगा, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र फिर से घने जंगल और जैव विविधता का केंद्र बन जाएगा।

इस अवसर पर संतलाल पटेल, कुंजल सिंह, बंशीधर सिदार, कमलसिंह पटेल, जयप्रकाश पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पौधारोपण किया और पौधों की सुरक्षा का संकल्प लिया।

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