बसना: खेती की जमीन पर बना रहे काॅलोनी तहसीलदार को पटवारी ने दिया जाँच प्रतिवेदन

देशराज दास बसना: नगर के पदमपुर रोड पर कृषि भूमि पर प्लाटिंग करके वार्ड नंबर 12 श्याम बिहार नाम का काॅलोनी बनाया जा रहा है। प्रशासन और राजस्व विभाग के नियमों से एकदम विपरीत और अवैध है। इससे ग्राहकों के साथ धोखा हो रहा है।
सूत्रों के माने तो इस जमींन इसमें कुछ की रजिस्ट्री भी हुई है। उस जमीन पर कॉलोनी बनाई जा रही है, वह भूमि राजस्व रिकार्ड में सिंचित कृषि भूमि दर्ज है जिस पर बिना डायवर्सन और जरूरी विभागों से अनुमति के बाद कालोनी बनाना या प्लाटिंग करना अवैध है। छोटे छोटे हिस्से करके भी प्लाट को बेचा नहीं जा सकता है। बसना नगर में रोड डालकर प्लाट काट दिए गए हैं। ग्राहकों को साइड दिखाकर प्लाट बेचे जा रहे है।
मिली जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 12 खसरा नंबर 112/5,112/7 और भी कई प्लाटिंग की जा रही है। बसना-पदमपुर मार्ग किनारे बंसूला-बसना में स्थित गुरुनानक धर्मशाला के पीछे, अरेकेल मार्ग स्थित, अरेकेल डिपा, खेमड़ा पंचायत अंर्तगत सोनी कॉलोनी व राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे, सिटी सिनेमा के पीछे कृषि भूमि और वार्ड नम्बर 02,03,06,04 वार्ड नम्बर 12 इत्यादि स्थानों पर कॉलोनी बन रहे है। देखना यह है इनमे से कितने लोगों ने कालोनाइजर एक्ट का पालन किया है। और अधिकारी कितनी जल्द होगी कार्रवाई करते है.
बसना नगर के बड़े दिग्गज 19 लोगो के नाम में अवैध कालोनी – आपको बतादे बसना नगर के बड़े दिग्गज 19 लोगो के नाम में अवैध कालोनी है उनका भी नाम अगले खबर में प्रकाशित किया जायेगा महासमुंद जिले के बसना में शासन की अनुमति के बिना ही कृषि योग्य भूमि की प्लाटिंग कर दी जा रही है। किसानों से जमीन खरीदकर प्लाट काट रहे हैं। एक्ट के अंतर्गत बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस व नियमों के बिना प्लाटिंग नहीं की जानी है। खेती जमीन का डायवर्सन भी जरुरी है। जितनी भी जमीन की खरीदी बिक्री हो रही है,जिसका खामियाजा आम जनता के साथ ही शासन को राजस्व की क्षति के रूप में हो रही है
आपको बतादे किसी भी कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर कॉलोनी बनाने से पहले कॉलोनाइजर का रेरा यानि रियल स्टेट अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। इसके बाद कॉलोनी काटने से पहले 15 प्रतिशत जमीन शासन को देना होती है जिसे शासन गरीबों को आवंटित कर सकता है। कॉलोनाइजर को कॉलोनी के विकास का अभिनयास नगर तथा ग्राम निवेश से अनुमोदन कराना आवश्यक है। कॉलोनी का विकास शुल्क किसी इंजीनियर से प्राक्कलन तैयार कराकर प्रस्तावित व्यय पर जो कॉलोनी में विकास किया जाना है, उसका दो प्रतिशत राशि विकास शुल्क के रूप में नगर परिषद में जमा की जाती है।
इसके बाद कॉलोनाइजर को वृहद प्रारूप एक में आवेदन एसडीएम और दूसरा कलेक्टर को प्रस्तुत करना होता हैं। वहीं प्रारूप दो में कलेक्टर को रजिस्ट्रीकरण के लिए अनुमति भी जाना होती है। बिना डायवर्सन के कॉलोनी काटना तो दूर भवन का निर्माण भी नहीं किया जा सकता है। नपा में नामांतरण शुल्क जमा करना होता है। अगर यह अर्हताएं पूरी नहीं होती हैं तो जमीन का 20 प्रतिशत जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान संबंधित कॉलोनाइजर पर है। एफआईआर नपा द्वारा कराई जाती है?
- इस संबंध में बसना तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू को फोन के माध्यम से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
- नगर पंचायत सीएमओ सूरज सिदार ने बताया कि जा जल्द अवैध कॉलोनी के मालिकों पर कार्यवाही की जाएगी।
- बसना हल्का पटवारी सत्तू सिंह ने मौखिक रूप से बताया कि प्रतिवेदन बनाकर तहसीलदार को जांच के लिए भेज दिया गया है बसना नगर के कॉलोनी अवैध है।