रायपुर

बड़ी खबर: राजधानी की फैक्ट्री में ब्लास्ट से सहमे ग्रामवासी…फैक्ट्री को गांव से दूर करने की उठी मांग..गार्डों ने पत्रकारों को घटनास्थल जाने से रोका

हरिमोहन तिवारी /सुरेन्द्र जैन/रायपुर. राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र धरसीवा से लगे टाडा गांव स्थित ग्रीन पेट्रो फ्यूल फैक्ट्री में शुक्रवार शाम को आयल टैंकरों में ब्लास्टिंग से पूरा गांव सहम उठा. खतरे को देखते हुए तीन वार्डों के रहवासियों को अन्यत्र व्यवस्था की गई, लेकिन रातभर कोई ग्रामीण चैन की नींद नहीं सो सके. अब सवाल यह उठता है कि इतने खतरनाक आयल प्लांट के लिए गांव से लगकर आख़िर अनुमति कैसे मिली क्या गांव व ग्रामीणो की जानमाल से बढ़कर खतरनाक आयल प्लांट हो गए है.

सरपंच ने कहा रिहायशी इलाकों से 10 किमी दूर हों ऐसे प्लांट
इस बड़ी घटना के बाद ग्राम पंचायत टांडा की सरपंच रुक्मणि शिवहरे ने कहा कि ऐसे खतरनाक प्लांट जिनसे ग्रामीणों की जानमाल को खतरा रहता है. वह रिहायशी इलाकों से कम से कम दस किलो मीटर दूर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्लांट लगाते समय तो उद्योगपति पूरी सुरक्षा की बात कहते हैं, लेकिन वास्तविकता में करते नहीं है. जिससे ऐसी घटनाएं होती हैं. ऐसे खतरनाक प्लांट गांव से दूर हो. इसके लिए वह जिला प्रशासन से मांग करेंगी.

मौत के मुहाने पर करीब आधा दर्जन गांव
टांडा सहित आसपास के करीब आधा दर्जन गांव ऐसे है, जो मौत के मुहाने पर हैं, सिलतरा मांढर टांडा अकोली के बीचों बीच गैस प्लांट भी मौजूद है और आसपास बड़ी संख्या में केमिकल टायर से आयल बनाने वाली फैक्ट्रियां एवं स्पंज आयरन प्लांट हैं, जिनमें ज्वलनशील गैस का भंडारण होता है, जो कभी भी इन गांवों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.

फायर कर्मी भी झुलसे
आयल टैंकरों में ब्लॉस्टिंग के साथ लगी भीषण आग को बुझाने सर्वप्रथम रायपुर एलायस शारडा एनर्जी नामक फैक्ट्री की दमकल गाड़ी पहुंची ओर दमकल कर्मी आग बुझाने लगे. इसी दौरान एक ओर टैंक ब्लॉस्ट हुआ, जिसमें तीन फायर कर्मी बुरी तरह झुलस गए, उन्हें तत्काल रायपुर के किसी निजी अस्पताल में भेजा गया.

इस्पात गोदावरी के गार्डों ने रोका पत्रकारों को
घटना के दूसरे दिन पत्रकार घटनास्थल की रिपोर्टिंग करने पहुंचे लेकिन गेट नम्बर चार पर मौजूद इस्पात गोदावरी के गार्डों ने पत्रकारों को घटनास्थल जाने से रोक दिया उन्होंने कहा कि ऊपर से हमे आदेश है हालांकि इसी दौरान बीमा कंपनी के लोग एवं कुछ अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे, जिन्हें गेट खोलकर घटनास्थल तक जाने दिया सिर्फ पत्रकारों को ही रोका गया.

आख़िर कौन है प्लांट का असली मालिक
ग्रीन पेट्रो फ्यूल का असली मालिक कौन है, उक्त फैक्ट्री किसकी है पत्रकारों को अंदर जाने से रोकने का काम इस्पात गोदावरी के गार्ड क्यों किया यह समझ से परे है, हालांकि ग्राम पंचायत सरपंच रुक्मणि शिवहरे ने कहा कि उन्होंने इस प्लांट की एनओसी आशीष सिंघानिया के नाम दी थी. वहीं सिलतरा चौकी प्रभारी का कहना है कि अभी तक घटना की कोई रिपोर्ट नहीं हुई है.

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