महासमुंद: बसना से 30 कि.मी. दुरी इस जंगल को साल में एक बार ही जाते है लोग,,,बाकी दिन जाने पर,,,,वा….

प्रकाश पटेल महासमुंद/बसना(ढालम).बसना ब्लॉक से 30 कि.मी. दुरी के ग्राम ढालम (चनाट) में एक जंगल है जिस पर साल में एक बार ही घूमनें जाते है लोग ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 50 से 60 वर्षों पहले इस जंगल जिसका नाम सरफ़खोल है एक मुनि महाराज इस जंगल के एक गुफा म तप करते थे.
लगभग 50 से 60 वर्ष पहले दीवाली के बाद पहले एकादसी को गुफा से बाहर आ कर आस पास के गाँव वालो को दर्शन दीये ओर बोले थे की हर साल इसी एकादशी के दिन आप सब इस जंगल को आकर सभी गुफाओ के दर्शन का आनद ले सकते है.तब से लेकर आज तक आस पास के सभी गाँव वाले यहाँ आते है ओर जंगल के दर्शन का आनद लेते है.

इस जंगल में अनेको प्रकार के गुफाएं है हर गुफा का अलग अलग नाम भी है परछी मरप,चांदी मरप,सोना मरप,अंधियारी मरप आदिसभी गुफाओ की अपनी अलग अलग विशेषताए है.आज के दिन इस जंगल में एक चींटी भी नही रहता लेकिन बाकी दिन जानवरो का भंडार होता है.
गाँव वालो की मान्यता है की मुनि जी नही रहते लेकिन उनका सत आज भी इस जंगल में है इसलिए सभी गाँव वाले जाकर पूजा अर्चना कर इस जंगल का आनद लेते है इस जंगल में ऐसी गुफा भी है जो सीधे जंगल से बाहर भी निकलता है. एक गुफा के अंदर कुवां भी है बहुत अद्भुत है. यह जंगल कहा जाता है की इस जंगल में पहले सर्पो का डेरा हुआ करता था जिसके कारण इस जंगल का नाम सरफखोल पड़ा.