बसना

बसना: सरस्वती शिशु मंदिर बसना में आचार्य विकास वर्ग

बसना: सरस्वती शिशु मंदिर बसना में रविवार को प्रथम आचार्य विकास वर्ग प्रातः 10:30 से 4:30 तक संपन्न हुआ | सर्वप्रथम मां सरस्वती ओम एवं मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर प्रार्थना किया गया | इस आवर्ती में 38 आचार्य एवं दीदीयां उपस्थित रहे | नरसिंह शिक्षा समिति के पदाधिकारियों को तिलक से सम्मानित किया गया | प्रथम सत्र में वरिष्ठ आचार्य श्री अभिमन्यु दास द्वारा प्रार्थना अभ्यास करवाया गया | पूर्व प्राचार्य श्री रमेश कर जी का स्वागत वर्तमान प्राचार्य श्री नंदू राम निर्मलकर के स्वागत के पश्चात द्वितीय सत्र में पूर्व प्राचार्य श्री रमेश कर ने “प्रशिक्षण की आवश्यकता क्यों है” इस विषय पर अपना अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि ईश्वरी इच्छा से ही मानव को उचित कार्य मिला है

| अतः उस कार्य को मनोयोग से करेंगे तभी ईश्वर का सम्मान होगा और स्वयं को आनंद की अनुभूति होगी | जीवन में हर पल नवीन से नवीन करने के लिए उम्दा रुक जाती है वहीं से उसका विकास रुक जाता है | मनुष्य का जीवन चलाय मान होना चाहिए | जिस प्रकार रुका हुआ पानी गंदा हो जाता है, उसी प्रकार मानव को बिना रुके बिना थके निरंतर परिश्रम करते रहना चाहिए अन्यथा मानसिक विकास रुक जाता है | तृतीय सत्र में श्री सुनील प्रधान सिंघनपुर विद्यालय के व्याख्याता ने नई शिक्षा नीति पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा इतना व्यापक है कि इसे पूर्ण रूप से परिभाषित नहीं कर सकते शिक्षा को समझना है तो सरस्वती शिशु मंदिर को समझना होगा |

विवेकानंद जी के अनुसार अपने अंतरनिहित गुण को प्रकट करना ही शिक्षा है | चतुर्थ सत्र में जगदीशपुर विद्यालय के गणित व्याख्याता श्री तरुण दास ने गणित शिक्षण अधिगम समस्या और निदान से अवगत कराते हुए कहा कि गणित में प्रायोगिक जरूरी है अभ्यास को इतना दुरुस्त करना है कि अभ्यास करते रहना है | पंचम सत्र में समिति के उपाध्यक्ष शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला बसना के व्याख्याता श्री सतीश चंद्र बेहरा अंग्रेजी शिक्षण पद्धति की गुणवत्ता को बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अंग्रेजी पढ़ना आवश्यक है | बच्चे का ग्रामर और बोलने का अभ्यास ठीक से हो इस पर ध्यान देना चाहिए समिति के व्यस्थापक श्री रामचंद्र अग्रवाल ने उत्सव के महत्व को बताते हुए कहा कि आज भारतीय संस्कृति में उत्सव का महत्व घटते जा रहा है | इस भारतीय संस्कृति को युवा योगों तक जीवित रखने के लिए संकल्प लेना होगा अपने सनातन धर्म को बचाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा अंत में संघ प्रार्थना के पश्चात विकिर किया गया |

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