बसना/बंसुला: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी के समय में हाउंसिंग बोर्ड महासमुन्द द्वारा बसना जनपद अंतर्गत के ग्राम बंसुला में 8 एकड़ शासकीय भूमि का चयन किया गया था ,अग्रिम राशि शुल्क के रूप में लेने के बाद अधुरा छोड़ दिया गया अटल आवास, अब हो रही पुनर्जीवित करने की मांग

बसना: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी के समय में हाउंसिंग बोर्ड महासमुन्द द्वारा बसना जनपद अंतर्गत के ग्राम बंसुला में 8 एकड़ शासकीय भूमि का चयन कर करोड़ो के लागत से आम जनता को हाउंसिंग कालोनी बनाकर आबंटन के लिए अटल आवास के नाम पर भूमि अधिग्रहण किया गया था. जिसमे सैकड़ो आवासीय भवन निर्माण करते हुए ऊक्त भवन को लोगो को आबंटन करने हेतु अग्रिम राशि शुल्क के रूप में जमा किये जाने लगा.
बताया गया कि किसी हितग्राही से 5 से 10 हजार तक तो किसी से 40 हजार तक रकम लिया गया था. और भवन को लगभग 1 लाख रु में पूर्ण करके देना था. जिसके बाद अटल आवस निर्माण होने लगा. इसी दौरान छतों के ढलाई करने के बाद अचानक कार्य को बन्द कर हाउंसिंग बोर्ड ने अटल आवास कार्य को बन्द कर दिया गया.
इसके कारण जाजने के लिए ग्रामीणो और सुपर वॉयजर जेएल बारीक ने बताया गया कि जिस जगह में यह अटल आवास निर्माण हो रहा था. वहां कुछ मकानों के निर्माण होने के बाद दरार आने लगा बताया गया कि उस समय बिना कॉलम के अटल आवस बनाए जा रहे थे और उस जमीन का मिट्टी को बहुत ही गीला और दलदल था.
निर्माणाधीन अटल आवासों में दरार आने के बाद अधिकारियों ने इसे हितग्राहियों को देने के लायक नही समझा और फिर से दोबारा बनाने का आश्वाशन के बाद आज के कई वर्ष गुजर गए है.
बंसूला निवासी रूपानंद साव ने बताया कि आज अधूरे अटल आवास को बने 15 वर्षो से अधिक हो गए है. उसके दीवाल को छबाई और छत के प्लाटर गिरने शुरू हो गए, देखरेख के आभाव में आवास के ग्रिल खिड़की दरवाजे कोई अज्ञात चोरों द्वारा उखाड़ कर चोरी कऱ लिया गया. और सुने भवनों में ओड़िसा राज्य, पश्चिम बंगाल राज्य सहित बहार से कई लोग आकर भवनों में अतिक्रमण कर रहना शुरू कर दिया. जिससे अक्सर गाँव में शांति भंग हो जाती है. अक्सर देर रात तक मारपीट, गाली गलौच और चोरी की शिकायतें मिलती है. जिसे सुलझाने लोगों को 112 पुलिस की मदद लेनी पड़ती है.
अब इस अटल आवास के अज्ञात बाहरी लोगो को हटाने की मुहिम पंच-सरपंच के द्वारा की जा रही है. जिसमे हाउंसिंग बोर्ड के अधिकारीं के द्वारा गाँव के ग्रामीणों के उपस्थिति में निर्णय लिया जायेगा. साथ ही हाउंसिंग बोर्ड को पत्र लिखकर भवन को पुनर्जीवित करने कहा जायेगा और नही आबंटन होने की स्थिति में जमा किये लोगो की अग्रिम शुल्क वापस किया जाने की मांग किया जाएगा.